| ردیف | نیمسال تحصیلی | نوع آزمون | پاسخنامه تستی | پاسخنامه تشریحی | توضیحات |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | ۱۴۰۴-۱۴۰۵-۱ | تستی | ![]() | ![]() | |
| 2 | ۱۴۰۳-۱۴۰۴-۲ | تستی | ![]() | ![]() | |
| 3 | ۱۴۰۲-۱۴۰۳-۲ | تستی | ![]() | ![]() | |
| 4 | ۱۴۰۲-۱۴۰۳-۱ | تستی | ![]() | ![]() | |
| 5 | ۱۴۰۱-۱۴۰۲-۲ | تستی | ![]() | ![]() | |
| 6 | تابستان ۱۴۰۱ | تستی | ![]() | ![]() | تغییر منبع از نیم سال دوم 1402-1401 |
| 7 | ۱۴۰۰-۱۴۰۱-۲ | تستی | ![]() | ![]() | |
| 8 | ۱۳۹۹-۱۴۰۰-۱ | تستی | ![]() | ![]() | |
| 9 | تابستان ۹۹ | تستی | ![]() | ![]() | |
| 10 | ۹۸-۹۹-۱ | تستی | ![]() | ![]() | |
| 11 | تابستان ۹۸ | تستی | ![]() | ![]() | |
| 12 | ۹۷-۹۸-۲ | تستی | ![]() | ![]() | |
| 13 | ۹۷-۹۸-۱ | تستی | ![]() | ![]() | |
| 14 | ۹۶-۹۷-۲ | تستی | ![]() | ![]() | |
| 15 | ۹۶-۹۷-۱ | تستی | ![]() | ![]() | |
| 16 | ۹۵-۹۶-۲ | تستی | ![]() | ![]() | |
| 17 | ۹۵-۹۶-۱ | تستی | ![]() | ![]() | |
| 18 | ۹۴-۹۵-۲ | تستی | ![]() | ![]() | |
| 19 | ۹۴-۹۵-۱ | تستی | ![]() | ![]() | |
| 20 | ۹۳-۹۴-۲ | تستی | ![]() | ![]() | |
| 21 | ۹۳-۹۴-۱ | تستی | ![]() | ![]() | |
| 22 | ۹۲-۹۳-۲ | تستی | ![]() | ![]() | |
| 23 | ۹۲-۹۳-۱ | تستی | ![]() | ![]() | |
| 24 | ۹۱-۹۲-۲ | تستی | ![]() | ![]() | |
| 25 | ۹۱-۹۲-۱ | تستی | ![]() | ![]() | |
| 26 | ۹۰-۹۱-۲ | تستی | ![]() | ![]() | |
| 27 | ۹۰-۹۱-۱ | تستی | ![]() | ![]() | |
| 28 | تابستان ۹۰ | تستی | ![]() | ![]() | |
| 29 | ۸۹-۹۰-۲ | تستی | ![]() | ![]() | |
| 30 | ۸۹-۹۰-۱ | تستی | ![]() | ![]() | |
| 31 | تابستان ۸۹ | تستی | ![]() | ![]() | |
| 32 | ۸۸-۸۹-۲ | تستی | ![]() | ![]() | |
| 33 | ۸۸-۸۹-۱ | تستی | ![]() | ![]() | |
| 34 | تابستان ۸۸ | تستی | ![]() | ![]() | |
| 35 | ۸۷-۸۸-۱ | تستی | ![]() | ![]() |
منظور از معنویت در نگاه قرآن کریم، حالتی است که انسان در آن احساس بندگی و تقرب به خدا میکند.این حالت با توجه به توضیحات متن، با این باور همراه است که خداوند را تنها آفریدهگار، خالق و مدیر و مدبر همه عالم میداند و به بندگی خدا رضایت میدهد.از این منظر، معنویت به وضوح با شناخت و پذیرش نقش بنیادین خدا در هستی و غایت زندگی همراه است.
همچنین معنویت به وسیله علم و ایمان و عمل صالح تقویت میشود و از این سه عنصر، انسان میتواند به مظهر و تجلی صفات و اسمای الهی بدل گردد.به بیان دیگر، با اتکا به علم، ایمان و انجام کارهای صالح میتواند وحدت بافایدهای از وجود الهی و آفریدگار را در زندگی روزمره نشان دهد.
بنابراین معنویت صرفا یک حالت ذهنی نیست بلکه ترکیبی از بندگی، تقرب، شناخت کارکرد و صورتی از ظهور صفات الهی است که در چارچوب آیات قرآنی و تعالیم دینی بیان میشود.با این نگرش، گزینه های اول و سوم نیز به این مفهوم اشاره دارند و در مجموع تمامی این جنبهها در یک معنای جامع حضور دارند؛ لذا گزینه چهارم که همه موارد را دربردارد درست است.